दशकों तक भारत के लिए मैन्युफैक्चरिंग केवल एक सपना था, लेकिन पिछले दस वर्षों में यह देश की आर्थिक रणनीति का केंद्र बन गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने ‘एस्पिरेशन’ (महत्वाकांक्षा) से ‘एक्जीक्यूशन’ (कार्यान्वयन) तक का सफर तय किया है। आज भारत केवल घोषणाओं पर नहीं, बल्कि मजबूत बुनियादी ढांचे और स्पष्ट औद्योगिक नीति के दम पर दुनिया का नया कारखाना बनने की ओर अग्रसर है। बुनियादी ढांचे का कायाकल्प: मैन्युफैक्चरिंग की सफलता का राज सप्लाई चेन की सुगमता में छिपा है। ‘पीएम गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान’ ने दशकों पुरानी बाधाओं को दूर किया है।
Category: Daily Current Affairs News Analysis
स्किल एक्सपोर्ट और FTA: क्या भारत अपने युवाओं को ‘ग्लोबल वर्कफोर्स’ बनाने के लिए तैयार है
भारत ने हाल ही में न्यूजीलैंड सहित 50 से अधिक देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) किए हैं। ये समझौते केवल सामानों के लिए नहीं, बल्कि भारतीय युवाओं के लिए विदेशों में नौकरी के द्वार भी खोल रहे हैं। यूरोप और पूर्वी एशिया जैसे उम्रदराज होते देशों को भारत के कुशल युवाओं की जरूरत है, लेकिन हमारा ‘प्रवासन प्रशासन’ (Migration Governance) आज भी 1980 के दशक के कानून पर टिका है। पुराने कानून की बाधा: भारत का प्रवासन ढांचा ‘उत्प्रवास अधिनियम 1983’ पर आधारित है। उस समय प्रवासी श्रमिक मुख्य रूप से खाड़ी देशों में जाते थे। आज भारतीय
डेटा गवर्नेंस: अब बोर्डरूम का सबसे बड़ा सिरदर्द, एक चूक और सैकड़ों करोड़ का जुर्माना
भारतीय कंपनियों के लिए डेटा अब केवल जानकारी नहीं, बल्कि एक ‘रणनीतिक जोखिम’ बन गया है। हाल के दिनों में विनियामक जुर्माने (Regulatory Penalties) सैकड़ों करोड़ तक पहुँच गए हैं। यदि किसी कंपनी का डेटा लीक होता है, तो उसे एक साथ साइबर सुरक्षा निकाय, डेटा प्रोटेक्शन अथॉरिटी और मार्केट रेगुलेटर (SEBI) का सामना करना पड़ता है। चुनौतियां और समाधान: कई कंपनियां पुराने आईटी सिस्टम और बिखरे हुए डेटा के साथ काम कर रही हैं, जिससे सुरक्षा में सेंध लगाना आसान हो जाता है। डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (DPDP) ढांचे के तहत, अब कंपनियों को डेटा लीक होने के चंद
परमाणु ऊर्जा का नया दौर: 100 गीगावाट बिजली और ₹18 लाख करोड़ का निवेश, भारत ने बदला 20 साल पुराना नियम
लगभग दो दशक पहले 2008 में हुए भारत-अमेरिका परमाणु समझौते ने जो सपना दिखाया था, वह अब हकीकत बनने जा रहा है। भारत ने अपने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को निजी और विदेशी निवेश के लिए खोल दिया है। दिसंबर 2025 में पारित नए कानून के साथ, भारत का लक्ष्य 2047 तक अपनी परमाणु क्षमता को 9 गीगावाट से बढ़ाकर 100 गीगावाट करना है। क्या बदला है? पुराने कानून में विदेशी कंपनियों के लिए ‘लायबिलिटी’ (Liability) यानी दुर्घटना की जिम्मेदारी के नियम बहुत कड़े थे, जिससे विदेशी निवेश रुका हुआ था। अब नए कानून ने इसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाया
भारतीय मिट्टी का ‘साइलेंट क्राइसिस’: अब यूरिया से नहीं, ‘इंटीग्रेटेड न्यूट्रिएंट मैनेजमेंट’ से बचेगी खेती
दशकों से भारतीय कृषि ने रिकॉर्ड उत्पादन किया है, लेकिन इसकी एक अदृश्य कीमत हमारी मिट्टी चुका रही है। रसायनों के अत्यधिक उपयोग ने मिट्टी को बेजान बना दिया है। “अधिक उर्वरक, अधिक उपज” का मॉडल अब काम करना बंद कर रहा है। ऐसे में ‘इंटीग्रेटेड न्यूट्रिएंट मैनेजमेंट’ (INM) यानी ‘एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन’ ही एकमात्र रास्ता है, जो मिट्टी को महज एक इनपुट के बजाय एक जीवित तंत्र (Living System) मानता है। संकट की गंभीरता: भारतीय किसान मुख्य रूप से नाइट्रोजनयुक्त उर्वरकों (विशेषकर यूरिया) पर निर्भर हैं। इससे मिट्टी में न केवल नाइट्रोजन, बल्कि सल्फर, जिंक और बोरॉन जैसे
