मिशन 8% ग्रोथ: अगले 20 साल तक कैसे बनी रहेगी भारत की रफ्तार? इन 5 मोर्चों पर जीत है जरूरी!

भारत ने चालू वर्ष की पहली छमाही में 8% की शानदार विकास दर हासिल की है, जिसने दुनिया को चौंका दिया है। लेकिन चुनौती इस आंकड़े पर जश्न मनाने की नहीं, बल्कि इसे अगले दो दशकों तक लगातार बनाए रखने की है। जापान, दक्षिण कोरिया और चीन जैसे देशों ने ही ऐसा ऐतिहासिक कारनामा किया है। भारत अब उस मुकाम पर है जहाँ से वह ‘मिडिल-इनकम ट्रैप’ से बाहर निकलकर 2047 तक ‘विकसित भारत’ बन सकता है।

शहरी और औद्योगिक सुधार: भारत की विकास दर को बनाए रखने के लिए शहरों को ‘ग्रोथ इंजन’ बनाना होगा। ‘अर्बन चैलेंज फंड’ के जरिए कचरा प्रबंधन और प्रदूषण जैसी समस्याओं का समाधान करना आवश्यक है। साथ ही, ‘क्लीन टेक’ और ‘सेमीकंडक्टर’ जैसे भविष्य के उद्योगों में आत्मनिर्भरता हासिल करनी होगी। निर्यात बढ़ाने के लिए हमें अपने सीमा शुल्क (Customs) नियमों को और अधिक सरल बनाना होगा।

नवाचार और पूंजी की लागत: भारत को अब ‘अनुदान’ आधारित शोध से निकलकर ‘मिशन-मोड’ नवाचार की ओर बढ़ना होगा। इसके लिए वैश्विक स्तर के शोधकर्ताओं को भारत लाना और उद्योग-अकादमिक सहयोग को मजबूत करना जरूरी है। इसके अतिरिक्त, भारत में पूंजी की लागत (Cost of Capital) विकसित देशों की तुलना में काफी अधिक है। राजकोषीय मजबूती और बॉन्ड मार्केट को गहरा करके ही निवेश को सस्ता और सुलभ बनाया जा सकता है।

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (Q&A)

प्रश्न 1: भारत को 2047 तक उच्च आय वाला देश बनने के लिए कितनी औसत विकास दर की आवश्यकता है? उत्तर: लगभग 8% की निरंतर विकास दर।

प्रश्न 2: ‘अर्बन चैलेंज फंड’ का मुख्य उद्देश्य क्या है? उत्तर: शहरों के बुनियादी ढांचे में सुधार और जलवायु जोखिमों के प्रबंधन के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना।

प्रश्न 3: भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए किस प्रशासनिक सुधार को महत्वपूर्ण माना गया है? उत्तर: सीमा शुल्क (Customs) और लॉजिस्टिक्स सुधार।

प्रश्न 4: नवाचार (Innovation) को बढ़ावा देने के लिए किस तरह के मॉडल की आवश्यकता है? उत्तर: उद्योग-अकादमिक सहयोग (जैसे वारविक मैन्युफैक्चरिंग ग्रुप मॉडल)।

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