स्पेस रेस में पिछड़ रहा है भारत? PSLV-C62 की विफलता और चीन की बढ़ती घेराबंदी के बीच ‘डेटा संप्रभुता’ का संकट

PSLV-C62 मिशन की विफलता केवल एक तकनीकी झटका नहीं है, बल्कि यह भारत के अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र में गहरी संरचनात्मक कमियों की चेतावनी है। ऐसे समय में जब अंतरिक्ष शक्ति का अर्थ सैन्य और आर्थिक शक्ति है, भारत का पिछड़ना रणनीतिक रूप से महंगा साबित हो सकता है। चीन अब न केवल अंतरिक्ष में आगे है, बल्कि वह पाकिस्तान और नेपाल जैसे पड़ोसियों के लिए उपग्रह लॉन्च कर भारत की घेराबंदी कर रहा है।

सैन्य स्पेस पावर की कमी: अमेरिका और चीन के पास समर्पित ‘स्पेस फोर्स’ है, जबकि भारत की ‘डिफेंस स्पेस एजेंसी’ (DSA) के पास अभी भी सीमित अधिकार और संसाधन हैं। भारत के पास ‘NavIC’ जैसी खुद की नेविगेशन प्रणाली है, लेकिन वह अभी भी पूरी तरह कार्यात्मक नहीं है। डेटा संप्रभुता (Data Sovereignty) के बिना, युद्ध की स्थिति में भारत को विदेशी उपग्रहों पर निर्भर रहना पड़ सकता है, जो एक बड़ा जोखिम है।

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (Q&A)

प्रश्न 1: भारत की अपनी क्षेत्रीय नेविगेशन उपग्रह प्रणाली का नाम क्या है? उत्तर: NavIC (Navigation with Indian Constellation)।

प्रश्न 2: हाल ही में किस मिशन की विफलता ने भारत की अंतरिक्ष प्रगति पर सवाल खड़े किए हैं? उत्तर: PSLV-C62।

प्रश्न 3: ‘डेटा संप्रभुता’ (Data Sovereignty) का अंतरिक्ष के संदर्भ में क्या महत्व है? उत्तर: निगरानी और संचार के लिए दूसरे देशों के उपग्रहों पर निर्भर न रहना।

प्रश्न 4: चीन का वैश्विक नेविगेशन सिस्टम कौन सा है जो NavIC का प्रतिस्पर्धी है? उत्तर: बेइदोऊ (Beidou)।

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