डीएनए पैकिंग में छोटे बदलाव जीन को ऑन या ऑफ कैसे कर सकते हैं
हमारी हर कोशिका के नाभिक में लगभग 2 मीटर लंबा डीएनए होता है, जो एक बहुत छोटे स्थान में पैक होकर रखा जाता है। यह पैकिंग सिर्फ जगह बचाने के लिए नहीं होती, बल्कि यह तय करती है कि कौन से जीन सक्रिय होंगे और कौन से बंद रहेंगे। हालिया शोध से पता चला है कि डीएनए की इस पैकिंग में बहुत छोटे बदलाव – बिना डीएनए अनुक्रम में कोई परिवर्तन किए – जीन की अभिव्यक्ति को पूरी तरह नियंत्रित कर सकते हैं।
डीएनए हिस्टोन प्रोटीन के चारों ओर लपेटकर न्यूक्लियोसोम बनाता है। ये न्यूक्लियोसोम लिंकर डीएनए से जुड़े रहते हैं और पूरी संरचना को क्रोमेटिन कहते हैं। क्रोमेटिन की संरचना ढीली हो तो जीन सक्रिय होते हैं, क्योंकि ट्रांसक्रिप्शन मशीनरी आसानी से पहुंच जाती है। घनी संरचना में जीन बंद रहते हैं।
शोध में पाया गया कि लिंकर डीएनए की लंबाई में मात्र 5 बेस पेयर का अंतर ही क्रोमेटिन की भौतिक विशेषताओं को बदल देता है। छोटे लिंकर पर क्रोमेटिन घना और कम तरल होता है, जबकि लंबे लिंकर पर यह ज्यादा तरल और गतिशील बनता है। यह बदलाव डीएनए की सर्पिल प्रकृति के कारण न्यूक्लियोसोम की दिशा को प्रभावित करता है।
यह प्रक्रिया एपिजेनेटिक्स का हिस्सा है, जहां जीन नियंत्रण बिना डीएनए सीक्वेंस बदले होता है। क्रोमेटिन एक स्व-संघटित संरचना की तरह काम करता है, जहां भौतिक नियम खुद पैटर्न बनाते हैं।
ऐसे छोटे बदलाव कोशिका के प्रकार, विकास और रोगों (जैसे कैंसर) में बड़ी भूमिका निभाते हैं। दोहराव वाले डीएनए क्षेत्रों में पैकिंग गड़बड़ी जीनोम को अस्थिर कर सकती है।
यह जानकारी हमें बताती है कि हमारा जीनोम सिर्फ अनुक्रम से नहीं, बल्कि उसकी त्रि-आयामी पैकिंग से भी नियंत्रित होता है। भविष्य में इससे नए उपचार विकसित हो सकते हैं।
