कर्नाटक ने रचा इतिहास: 2025 में रिकॉर्ड 198 अंगदाताओं ने दी हजारों को नई जिंदगी

कर्नाटक ने 2025 में अंगदान के क्षेत्र में कमाल कर दिखाया है। राज्य में अब तक का सबसे ज्यादा सालाना अंगदान हुआ है, कुल 198 दाताओं के साथ। इससे न सिर्फ लोगों में जागरूकता बढ़ने का पता चलता है, बल्कि अस्पतालों और ट्रांसप्लांट टीमों के बीच बेहतरीन तालमेल भी दिखता है। ये बड़ी कामयाबी जीवसार्थकते (Jeevasarthakathe) की बदौलत मिली है, जो कर्नाटक की राज्य स्तर की अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संस्था (SOTTO) है।

रिकॉर्ड तोड़ा और देश में तीसरा स्थान हासिल किया

2025 में 198 दाताओं के साथ कर्नाटक ने अपना पुराना रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिया। पहले 2023 में 178 दाता थे, जबकि 2024 में 162। इस शानदार प्रदर्शन से राज्य देश में तीसरे नंबर पर पहुंच गया है। टॉप पर तमिलनाडु और तेलंगाना हैं। ये 숫रे साफ बताते हैं कि कर्नाटक में अंगदान को लेकर जागरूकता और लोगों की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है।

दाताओं का प्रोफाइल और मिले अंगों की डिटेल

198 दाताओं में 150 पुरुष और 48 महिलाएं शामिल थीं। इनसे मिले अंगों की लिस्ट देखिए:

306 किडनी, 288 कॉर्निया (आंखें), 167 लिवर, 76 हार्ट वॉल्व, 50 दिल, 29 फेफड़े, 33 स्किन ग्राफ्ट, 2 हड्डियां और 1 छोटी आंत।

इतने तरह के अंग मिलना साबित करता है कि अस्पतालों और ट्रांसप्लांट टीमों का समन्वय कितना बेहतर हो गया है।

ज्यादातर योगदान बेंगलुरु से, अब जिलों में फैलाएंगे जागरूकता

राज्य के अधिकारियों के मुताबिक, 80-85% अंगदान बेंगलुरु से ही आया है, जबकि मैसूरु से बहुत कम। जीवसार्थकते के राज्य समन्वयक डॉ. रविशंकर शेट्टी ने बताया कि 2026 में फोकस जिला स्तर पर होगा। इसके लिए:

चिकित्सा कॉलेजों को जोड़ा जाएगा, नॉन-ट्रांसप्लांट ह्यूमन ऑर्गन रिट्रीवल सेंटर्स (NTHORCs) से अंग संग्रह बढ़ाया जाएगा, और ग्रामीण इलाकों में बड़े जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे।

खबर से जुड़े जरूरी जीके फैक्ट्स

कर्नाटक ने 2025 में 198 अंगदाताओं के साथ अपना सबसे बड़ा रिकॉर्ड बनाया। अंगदान में देश में तीसरा स्थान। सबसे ज्यादा किडनी और कॉर्निया दान हुए। राज्य में अंग और ऊतक प्रत्यारोपण का काम जीवसार्थकते (SOTTO) संभालती है।

मांग और सप्लाई के बीच बड़ा गैप, लेकिन उम्मीद बाकी है

ये रिकॉर्ड ब्रेकिंग उपलब्धि तो हुई, लेकिन अभी भी चुनौती बाकी है। कर्नाटक में करीब 5,500 मरीज अंग ट्रांसप्लांट का इंतजार कर रहे हैं। इनमें 4,700 से ज्यादा किडनी के और करीब 650 लिवर के मरीज हैं।

इस गैप को कम करने के लिए जीवसार्थकते ने पुलिस विभाग के साथ मिलकर एक्सीडेंट prone एरिया की पहचान शुरू की है, ताकि संभावित दाताओं का पता चल सके। साथ ही हायर एजुकेशन विभाग के साथ मिलकर स्टूडेंट्स में अंगदान की शपथ दिलाने के अभियान प्लान किए जा रहे हैं।

ये सभी कदम कर्नाटक को अंगदान में लीडर बनाने की दिशा में हैं और हजारों मरीजों को नई जिंदगी की उम्मीद दे रहे हैं!

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