उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में ‘हर घर जल’ योजना ने न केवल प्यास बुझाई है, बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य और जीवन स्तर को भी ऊँचा उठाया है। अब राज्य सरकार इस योजना के वास्तविक प्रभाव को समझने के लिए सभी मंडलों में एक विस्तृत अध्ययन करवा रही है। विशेष रूप से बुंदेलखंड जैसे जल संकट वाले क्षेत्र की जिम्मेदारी देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIT मद्रास को सौंपी गई है।
स्वास्थ्य में सुधार के प्रमाण: प्रारंभिक अध्ययनों (जैसे अयोध्या, वाराणसी, प्रयागराज और गोरखपुर मंडलों में) से यह स्पष्ट हुआ है कि पाइप से शुद्ध पेयजल मिलने के कारण जलजनित बीमारियों (Water-borne diseases) में भारी कमी आई है। इससे पहले झांसी और चित्रकूट जैसे क्षेत्रों में भी स्वास्थ्य के स्तर में सकारात्मक बदलाव दर्ज किए गए हैं।
अध्ययन की रणनीति: राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन ने प्रस्ताव तैयार किया है कि बुंदेलखंड मंडल का वैज्ञानिक मूल्यांकन IIT मद्रास करेगा। वहीं मुरादाबाद, आगरा और मेरठ जैसे अन्य मंडलों के लिए केंद्रीय विश्वविद्यालयों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की मदद ली जाएगी। यह अध्ययन बताएगा कि शुद्ध पानी पहुँचने से महिलाओं के समय की बचत, बच्चों के स्वास्थ्य और स्थानीय रोजगार पर क्या प्रभाव पड़ा है।
विस्तृत रिपोर्ट: सरकार इस अध्ययन के आधार पर एक विस्तृत ‘इम्पैक्ट असेसमेंट रिपोर्ट’ तैयार करेगी। यह रिपोर्ट भविष्य की योजनाओं और जल प्रबंधन की नीतियों के लिए आधार बनेगी। जल जीवन मिशन के तहत उत्तर प्रदेश अब तक करोड़ों घरों को पाइप कनेक्शन से जोड़ चुका है।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (Q&A)
प्रश्न 1: ‘हर घर जल’ योजना के प्रभाव का अध्ययन करने के लिए बुंदेलखंड क्षेत्र की जिम्मेदारी किसे दी गई है? उत्तर: IIT मद्रास।
प्रश्न 2: जल जीवन मिशन (JJM) का मुख्य लक्ष्य क्या है? उत्तर: वर्ष 2024 तक हर ग्रामीण घर को ‘कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन’ (FHTC) प्रदान करना।
प्रश्न 3: किन मंडलों में प्रारंभिक अध्ययन के दौरान स्वास्थ्य स्तर में सबसे अधिक सुधार देखा गया है? उत्तर: झांसी, चित्रकूट और गोरखपुर।
प्रश्न 4: जल जीवन मिशन किस केंद्रीय मंत्रालय के अंतर्गत आता है? उत्तर: जल शक्ति मंत्रालय।
