भारतीय मिट्टी का ‘साइलेंट क्राइसिस’: अब यूरिया से नहीं, ‘इंटीग्रेटेड न्यूट्रिएंट मैनेजमेंट’ से बचेगी खेती

दशकों से भारतीय कृषि ने रिकॉर्ड उत्पादन किया है, लेकिन इसकी एक अदृश्य कीमत हमारी मिट्टी चुका रही है। रसायनों के अत्यधिक उपयोग ने मिट्टी को बेजान बना दिया है। “अधिक उर्वरक, अधिक उपज” का मॉडल अब काम करना बंद कर रहा है। ऐसे में ‘इंटीग्रेटेड न्यूट्रिएंट मैनेजमेंट’ (INM) यानी ‘एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन’ ही एकमात्र रास्ता है, जो मिट्टी को महज एक इनपुट के बजाय एक जीवित तंत्र (Living System) मानता है।

संकट की गंभीरता: भारतीय किसान मुख्य रूप से नाइट्रोजनयुक्त उर्वरकों (विशेषकर यूरिया) पर निर्भर हैं। इससे मिट्टी में न केवल नाइट्रोजन, बल्कि सल्फर, जिंक और बोरॉन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों की भारी कमी हो गई है। मिट्टी की गुणवत्ता गिरने से लागत बढ़ रही है और फसलें मौसम की मार के प्रति संवेदनशील हो गई हैं।

क्या है INM? यह रासायनिक उर्वरकों का पूर्ण बहिष्कार नहीं है, बल्कि उनका संतुलित उपयोग है। इसमें चार चीजें शामिल हैं:

  1. मिट्टी की जरूरत के अनुसार सटीक रासायनिक खाद।
  2. जैविक खाद जैसे कंपोस्ट और वर्मीकंपोस्ट।
  3. बायो-फर्टिलाइजर जैसे राइजोबियम और एजोटोबैक्टर।
  4. फसल अवशेषों का पुनर्चक्रण।

फायदा: आईएनएम से मिट्टी की जल धारण क्षमता बढ़ती है, जिससे सूखे के दौरान भी फसलें बची रहती हैं। साथ ही, सूक्ष्मजीवों और केंचुओं (मिट्टी के इंजीनियर) की संख्या बढ़ती है, जो मिट्टी की उर्वरता को प्राकृतिक रूप से बनाए रखते हैं।

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (Q&A)

प्रश्न 1: एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (INM) का मुख्य उद्देश्य क्या है?उत्तर: रासायनिक उर्वरकों और जैविक आदानों के संतुलित उपयोग से मिट्टी की उर्वरता बनाए रखना।

प्रश्न 2: भारत सरकार की कौन सी योजना मिट्टी के परीक्षण के आधार पर उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देती है?उत्तर: मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना (Soil Health Card Scheme)।

प्रश्न 3: धान की खेती में नाइट्रोजन की आवश्यकता का आकलन करने के लिए किस सरल उपकरण का उपयोग किया जाता है?उत्तर: लीफ कलर चार्ट (Leaf Colour Chart)।

प्रश्न 4: मिट्टी के सूक्ष्मजीव जैसे राइजोबियम किस महत्वपूर्ण कार्य में मदद करते हैं?उत्तर: नाइट्रोजन स्थिरीकरण (Nitrogen Fixation)।

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