भारत ने हाल ही में न्यूजीलैंड सहित 50 से अधिक देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) किए हैं। ये समझौते केवल सामानों के लिए नहीं, बल्कि भारतीय युवाओं के लिए विदेशों में नौकरी के द्वार भी खोल रहे हैं। यूरोप और पूर्वी एशिया जैसे उम्रदराज होते देशों को भारत के कुशल युवाओं की जरूरत है, लेकिन हमारा ‘प्रवासन प्रशासन’ (Migration Governance) आज भी 1980 के दशक के कानून पर टिका है।
पुराने कानून की बाधा: भारत का प्रवासन ढांचा ‘उत्प्रवास अधिनियम 1983’ पर आधारित है। उस समय प्रवासी श्रमिक मुख्य रूप से खाड़ी देशों में जाते थे। आज भारतीय छात्र और पेशेवर अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और जर्मनी जैसे देशों में सबसे बड़ी संख्या में हैं, लेकिन उन्हें सुरक्षा और स्पष्ट नीति का अभाव खलता है।
भविष्य की रणनीति: एक आधुनिक प्रवासन नीति के लिए भारत को अपनी कौशल प्रमाणन (Skill Certification) प्रक्रिया को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप लाना होगा। साथ ही, विदेशों में काम करने वाले भारतीयों की सामाजिक सुरक्षा और कानूनी अधिकारों के लिए मजबूत द्विपक्षीय समझौते करने होंगे।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (Q&A)
प्रश्न 1: वर्तमान में भारत का उत्प्रवास (Emigration) मुख्य रूप से किस पुराने अधिनियम द्वारा विनियमित होता है?उत्तर: उत्प्रवास अधिनियम, 1983।
प्रश्न 2: वर्ष 2024-25 में भारत दुनिया का सबसे बड़ा प्रेषण (Remittance) प्राप्तकर्ता रहा, यह राशि लगभग कितनी थी?उत्तर: $135 बिलियन से अधिक।
प्रश्न 3: विदेशों में भारतीय नागरिकों की सहायता के लिए विदेश मंत्रालय द्वारा संचालित प्रमुख पोर्टल कौन से हैं?उत्तर: MADAD और समाधान (Samadhan)।
प्रश्न 4: ‘Mode 4’ एक्सेस का संबंध व्यापार समझौतों में किससे है?उत्तर: सेवाओं की आपूर्ति के लिए प्राकृतिक व्यक्तियों (पेशेवरों) की आवाजाही।
