भारतीय रेलवे ने सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण और दुनिया की सबसे ऊंची बिलासपुर-मनाली-लेह रेललाइन परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) रक्षा मंत्रालय को सौंप दी है। 1.31 लाख करोड़ रुपये की लागत वाली यह 489 किलोमीटर लंबी रेललाइन न केवल लद्दाख और हिमाचल प्रदेश की तस्वीर बदलेगी, बल्कि चीन सीमा पर भारतीय सेना की रसद और आवाजाही की क्षमता को कई गुना बढ़ा देगी।
आधुनिक इंजीनियरिंग का चमत्कार: यह रेललाइन आधुनिक इंजीनियरिंग का एक उत्कृष्ट उदाहरण होगी, जिसका 55% हिस्सा (लगभग 270 किमी) सुरंगों से होकर गुजरेगा। इस पूरे ट्रैक पर 62 सुरंगें और 116 बड़े पुल बनाए जाएंगे। समुद्र तल से 15 हजार फीट से अधिक की ऊंचाई पर बिछने वाले इस ट्रैक पर ट्रेन 100 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ेगी। इस परियोजना के पूरा होने के बाद दिल्ली से लेह पहुँचने का समय 40 घंटे से घटकर मात्र 20 घंटे रह जाएगा।
हवाई जहाज जैसी सुविधाएं: अत्यधिक ऊंचाई और ऑक्सीजन की कमी को देखते हुए इस ट्रेन के कोच सामान्य नहीं होंगे। यात्रियों की सुरक्षा के लिए कोचों में प्रेशराइज्ड केबिन (हवाई जहाज की तरह) और हाईटेक हीटिंग सिस्टम लगाया जाएगा ताकि वायुदाब और ऑक्सीजन का स्तर स्थिर रहे। इस रेलमार्ग पर स्थित टेंगला स्टेशन समुद्र तल से 5,359 मीटर की ऊंचाई पर बनेगा, जो दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे स्टेशन होगा। उत्तरी रेलवे ने इसका अंतिम स्थान सर्वेक्षण (Final Location Survey) पूरा कर लिया है।
महत्वपूर्ण बहुविषय प्रश्न (MCQs)
1. बिलासपुर-मनाली-लेह रेललाइन परियोजना की कुल अनुमानित लागत कितनी है?
A) ₹50,000 करोड़
B) ₹1.31 लाख करोड़
C) ₹2.5 लाख करोड़
D) ₹80,000 करोड़
उत्तर: B) ₹1.31 लाख करोड़
व्याख्या: यह भारत की सबसे महंगी और सामरिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं में से एक है।
2. इस रेलमार्ग पर बनने वाला दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे स्टेशन कौन सा होगा?
A) मनाली स्टेशन
B) लेह स्टेशन
C) टेंगला स्टेशन
D) केलांग स्टेशन
उत्तर: C) टेंगला स्टेशन
व्याख्या: टेंगला स्टेशन समुद्र तल से 5,359 मीटर की ऊंचाई पर स्थित होगा, जो एक विश्व कीर्तिमान होगा।
3. बिलासपुर-लेह रेललाइन की कुल लंबाई कितनी है और इसका कितना प्रतिशत हिस्सा सुरंगों में होगा?
A) 489 किमी लंबाई, 55% सुरंगें
B) 600 किमी लंबाई, 30% सुरंगें
C) 350 किमी लंबाई, 80% सुरंगें
D) 489 किमी लंबाई, 10% सुरंगें
उत्तर: A) 489 किमी लंबाई, 55% सुरंगें
व्याख्या: दुर्गम पहाड़ों के कारण 270 किमी का हिस्सा सुरंगों के भीतर बनाया जा रहा है।
4. इस ट्रेन के कोचों को ‘प्रेशराइज्ड केबिन’ के रूप में क्यों डिजाइन किया गया है?
A) तेज रफ्तार के लिए
B) ऑक्सीजन की कमी और वायुदाब को स्थिर रखने के लिए
C) केवल सुंदरता के लिए
D) अधिक यात्रियों को बिठाने के लिए
उत्तर: B) ऑक्सीजन की कमी और वायुदाब को स्थिर रखने के लिए
व्याख्या: 15,000 फीट की ऊंचाई पर ऑक्सीजन बहुत कम होती है, इसलिए यात्रियों की सुरक्षा के लिए विमान जैसी तकनीक अपनाई गई है।
