भारतीय कंपनियों के लिए डेटा अब केवल जानकारी नहीं, बल्कि एक ‘रणनीतिक जोखिम’ बन गया है। हाल के दिनों में विनियामक जुर्माने (Regulatory Penalties) सैकड़ों करोड़ तक पहुँच गए हैं। यदि किसी कंपनी का डेटा लीक होता है, तो उसे एक साथ साइबर सुरक्षा निकाय, डेटा प्रोटेक्शन अथॉरिटी और मार्केट रेगुलेटर (SEBI) का सामना करना पड़ता है।
चुनौतियां और समाधान: कई कंपनियां पुराने आईटी सिस्टम और बिखरे हुए डेटा के साथ काम कर रही हैं, जिससे सुरक्षा में सेंध लगाना आसान हो जाता है। डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (DPDP) ढांचे के तहत, अब कंपनियों को डेटा लीक होने के चंद घंटों के भीतर सटीक जानकारी देनी होती है।
गवर्नेंस के 5 स्तंभ:
- एकीकृत डेटा आर्किटेक्चर: डेटा को बिना हटाए उसकी सटीक खोज करना।
- ऑटोमेटेड कंप्लायंस: डिजिटल डेटा प्रोटेक्शन नियमों का स्वचालित पालन।
- डेटा अखंडता: अदालती कार्यवाही के लिए डेटा की प्रामाणिकता बनाए रखना।
- बिजनेस-इम्पैक्ट रिकवरी: प्राथमिकता के आधार पर महत्वपूर्ण डेटा को पहले रिकवर करना।
- एग्जीक्यूटिव कम्युनिकेशन: लिए गए निर्णयों का डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखना।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (Q&A)
प्रश्न 1: भारत का कौन सा नया कानून व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा और गोपनीयता को विनियमित करता है?उत्तर: डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (DPDP) अधिनियम।
प्रश्न 2: साइबर सुरक्षा और डेटा सुरक्षा के लिए भारत की शीर्ष एजेंसी कौन सी है?उत्तर: CERT-In (Indian Computer Emergency Response Team)।
प्रश्न 3: डेटा गवर्नेंस में ‘रिकवरी ऑब्जेक्टिव’ का क्या अर्थ है?उत्तर: किसी आपदा या डेटा लॉस के बाद कितनी जल्दी महत्वपूर्ण बिजनेस डेटा को फिर से शुरू किया जा सकता है।
प्रश्न 4: डेटा अखंडता (Data Integrity) क्यों महत्वपूर्ण है?उत्तर: यह सुनिश्चित करने के लिए कि डेटा के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं हुई है और वह कानूनी रूप से मान्य है।
