गुजरात का ‘करुणा अभियान’: उत्तरायण में पतंगों के बीच सुरक्षित रहेगा पक्षियों का आसमान

गुजरात में उत्तरायण (मकर संक्रांति) का त्योहार बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है, लेकिन पतंगों के धागे (मांझा) अक्सर बेजुबान पक्षियों के लिए काल बन जाते हैं। इस समस्या के समाधान के लिए गुजरात सरकार ने ‘करुणा अभियान’ (Karuna Abhiyan) के तहत एक व्यापक सुरक्षा कवच तैयार किया है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने इस अभियान की समीक्षा करते हुए सुनिश्चित किया है कि इस उत्सव के दौरान किसी भी घायल पक्षी को तत्काल चिकित्सा सहायता मिले।

अभियान की तैयारी: इस साल राज्य भर में 728 पशु चिकित्सकों और 8,620 से अधिक प्रशिक्षित स्वयंसेवकों की एक विशेष टीम तैनात की गई है। सरकार ने शहरों और ग्रामीण इलाकों में 1,036 उपचार और संग्रह केंद्र (Treatment Centres) बनाए हैं। विशेष रूप से अहमदाबाद के ‘वाइल्डलाइफ केयर सेंटर’ को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया है ताकि गंभीर रूप से घायल पक्षियों का ऑपरेशन किया जा सके।

डिजिटल सपोर्ट और जागरूकता: सरकार ने एक समर्पित व्हाट्सएप नंबर जारी किया है जिसके माध्यम से नागरिक अपने नजदीकी पक्षी उपचार केंद्र की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। यह डिजिटल पहल रिस्पांस टाइम को कम करने में मदद कर रही है। इसके साथ ही ‘सिंथेटिक’ या ‘चाइनीज मांझा’ के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है, जो पक्षियों के पंखों को बुरी तरह काट देता है।

संदेश: करुणा अभियान न केवल एक बचाव कार्य है, बल्कि यह इंसानों को प्रकृति और वन्यजीवों के प्रति संवेदनशील बनाने की एक मुहिम है। यह दर्शाता है कि संस्कृति का आनंद पर्यावरण की रक्षा के साथ भी लिया जा सकता है।

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (Q&A)

प्रश्न 1: ‘करुणा अभियान’ किस राज्य सरकार की पहल है, जो पतंग उत्सव के दौरान घायल पक्षियों के बचाव के लिए चलाई जाती है? उत्तर: गुजरात सरकार।

प्रश्न 2: करुणा अभियान मुख्य रूप से किस त्योहार के दौरान सक्रिय होता है? उत्तर: उत्तरायण (मकर संक्रांति)।

प्रश्न 3: घायल पक्षियों की सूचना देने और सहायता प्राप्त करने के लिए किस डिजिटल माध्यम का उपयोग बढ़ाया गया है? उत्तर: व्हाट्सएप (WhatsApp) हेल्पलाइन।

प्रश्न 4: वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (Wildlife Protection Act) भारत में किस वर्ष लागू किया गया था? उत्तर: 1972।

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